घरेलू वस्तुओं और संगीत वाद्ययंत्रों को प्रदर्शित करता आदिवासी कला और कलाकृति संग्रहालय भुवनेश्वर में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। भारत के सर्वश्रेष्ठ आदिवासी संग्रहालयों में से एक इस संग्रहालय की स्थापना 1953 में ओडिशा की आदिवासी संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा इस संग्रहालय को भारत के 21 आदिवासी संग्रहालयों में से सर्वश्रेष्ठ के रूप में मान्यता दी गई थी।

यह संग्रहालय पांच अलग-अलग सभागारों में विभाजित है जहाँ स्थानीय जनजातियों की जीवन शैली को दर्शाया जाता है। वर्तमान में, इस संग्रहालय के परिसर के भीतर 2,247 कलाकृतियाँ मौजूद हैं। यहां संथाल जनजाति की फूट साड़ी, बोंडा जनजाति की रिंगा और यहां लंजिया सओरा जनजाति के गाटूंगकप जैसी पारंपरिक वेशभूषाएं भी देखने को मिल सकती हैं। यहाँ का दालान विशेष रूप से दिलचस्प है और इसमें आदिवासी देवताओं के अतिरिक्त 14 आदिवासी तीर्थ शिल्प की प्रतिकृतियाँ भी मौजूद हैं। 

इसके अलावा, गडाबा, सओरा, संथाल, जुआंग और कोंध जैसी ओडिशा जनजातियों की आकर्षक झोपड़ियों की आकर्षक झांकियों भी यहाँ देखी जा सकती हैं जो कि अपने वास्तविक वातावरण का जीवंत निरूपण करती हैं। संग्रहालय में एक पुस्तकालय और एक छोटा चिड़ियाघर भी है।