जैसलमेर से 155 किमी दूर अनोखा और निर्मल बाड़मेर कस्बा स्थित है। यह उत्तर में जैसलमेर और पूर्व में जोधपुर से घिरा हुआ है और पश्चिम में इस की सीमा पाकिस्तान से लगी हुई है। यह थार रेगिस्तान को बनाने वाले चार सबसे बड़े महानगरों का हिस्सा है और यह अपने हस्त निर्मित ब्लॉक प्रिंटिंग उद्योगए लकड़ी की नक्काशीए मिट्टी के बर्तनोंए रंग बिरंगे कामदार परंपरागत राजस्थानी वस्त्रों और अजरक प्रिंट के लिए जाना जाता है। बाड़मेर से लगभग 35 किमी दूर भूतपूर्व किरादू कस्बे में स्थापत्य के हिसाब से उल्लेखनीय पाँच मंदिर हैंए इनमें सोमेश्वर मंदिर अपने बहु स्तरीय शिखर के कारण सबसे ज़्यादा प्रभावशाली है। बाड़मेर लूनी नदी का भी घर हैए जो 500 किमी की यात्रा करते हुए आखिरकार कच्छ के रण की दलदली भूमि में विलीन हो जाती है।

तिलवारा गाँव में मल्लानी परगनाए जो एक राजपूत बस्ती हैए के संस्थापक रावल मल्लिनाथ को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से वार्षिक मल्लिनाथ पशु मेले का आयोजन किया जाता हैए जो एक मुख्य आकर्षण है। अन्य लोकप्रिय आकर्षण बाड़मेर का किला हैए जिसे बाड़मेर गढ़ भी कहा जाता है जो 1552 ईस्वी में एक छोटी पहाड़ी पर बनवाया गया था जो आज का बाड़मेर है। इस किले की सुरक्षा के लिए देवताओं का आशीर्वाद पाने के मक़सद से दो महत्वपूर्ण मंदिर बनवाए गए थेए जिनमें से एक जोगमाया मंदिर ;गढ़ मंदिरद्ध हैए जो 1383 फुट की ऊँचाई पर स्थित है और दूसरा नागणेची माता का मंदिर है जो 500 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ कई मेलों का आयोजन किया जाता हैए विशेषतः नवरात्रि ;एक पवित्र नौ दिन का त्योहारद्ध के अवसर पर। 

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