पार्टिशन म्यूज़ियम

यह संग्रहालय टाउन हॉल में स्थित है, जिसमें भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण निधि विद्यमान है। इसमें उन कलात्मक चीज़ों का व्यापक संग्रह उपलब्ध है जिन्हें उन लोगों ने दान दी थीं, जो भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय बच गए थे। ये वही कलाकृतियां हैं जिन्हें लोग अपनी सीमा के निर्दिष्ट भाग में अपने साथ ले गए थे। इस संग्रहालय का उद्घाटन 25 अगस्त, 2017 को किया था जिसका उद्देश्य इसे अभिलेखागार, दस्तावेज़ों, कथाओं और विभाजन के इतिहास के भंडार का स्वरूप प्रदान करना था।

विभाजन के दौरान कलाकारों, गीतकारों एवं कवियों के संघर्ष के प्रलेखन के रूप में उनकी चित्रकारी एवं कविताओं को भी संग्रहालय में सहेजकर रखा गया है। इतिहास को अधिक सुवक्तापूर्ण बनाने के लिए इस संग्रहालय की 14 दीर्घाओं में ऑडियो-वीजुअल स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें भुक्तभोगी लोगों के साक्षात्कार दिखाए गए हैं।   

राम बाग महल

सुंदर बाग वाले इस महल का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह द्वारा ग्रीष्मकालीन महल के रूप में कराया था। यह दो मंज़िला भवन है जिसकी वास्तुकला इंडो-अरबी शैली में है। इस महल के चार प्रवेशद्वार हैं, जो राजस्थानी प्रभावों के साथ मिश्रित पंजाब की स्थापत्य शैली की याद ताज़ा कराते हैं। महल का भीतरी भाग भी उतना ही सुंदर है, जितना कि बाहरी भाग, इसके अनेक कमरों की छतें खातमबंद तकनीक से सुसज्जित हैं जो कश्मीर की अनोखी कला होती है। ऐसा कहा जाता है कि महाराजा जब अमृतसर आते थे तब इसी महल में ठहरा करते थे। यह महल हरे-भरे बागों के बीच बना है जिनमें दुर्लभ पौधे व वृक्ष हैं तथा पानी की अनेक नालियां बनी हुई है। घोड़े पर बैठे हुए महाराजा रणजीत सिंह, सिख साम्राज्य के नेता की विशाल मूर्ति प्रमुख आकर्षण है।

यहां के बाग जो हरियाली से भरपूर हैं, उन्हें रणजीत सिंह ने ही लगाया था। ये मुग़ल बागों से प्रभावित थे तथा इनमें लाल पत्थर का बहुत काम किया गया है। यद्यपि ये बाग गर्मियों की दोपहरी में तपती गर्मी से राहत पाने के लिए उपयुक्त जगह हैं, किसी को भी यह महल देखने अवश्य जाना चाहिए। यह अपने समय से काफ़ी उन्नत था, जिसमें एक तरणताल भी था जो महल में रहने वाली महिलाओं के लिए ही बनवाया गया था।

राम बाग महल

अमृतसर हेरिटेज वॉक

अमृतसर की हेरिटेज वॉक में गाइड द्वारा 400 वर्ष पुराने इस शहर की सैर कराई जाती है। यह यात्रा इस शहर की समृद्ध वास्तुकला एवं पारंपरिक विरासत के बीच कराई जाती है। यह यात्रा टाउन हॉल, जिसका निर्माण 1866 में अंग्रेज़ों ने कराया था, से आरंभ होकर धीरे-धीरे चलते हुए सिख धर्म के इतिहास का अवलोकन कराती है कि किस प्रकार से इस शहर की ज़मीन पर अनेक युद्ध लड़े गए तथा अंग्रेज़ यहां आए। अमृतसर के स्थानीय परिवेश का अनुभव प्राप्त करने के लिए अकेले पर्यटक, परिवार एवं दंपत्ति अकसर इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आतुर दिखते हैं। इसके तहत गुरुद्वारा सारागढ़ी से लेकर किला आहलुवालिया तक दिखाया जाता है। अंततः इस यात्रा की समाप्ति प्रतिष्ठित स्वर्ण मंदिर में होती है। गुरुद्वारा सारागढ़ी 36 सिख बटालियन के उन 21 बहादुर सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत पर अपने प्राणों की आहुति दी थी। वहीं किला आहलुवालिया औपनिवेशिक शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह यात्रा मिनी-फूड टूर के रूप में भी प्रसिद्ध है। इसके तहत कोई भी उन स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद चख सकता है, जिसके लिए अमृतसर प्रसिद्ध है।

यह एक फूड वॉक भी होती है तथा इसमें कोई भी पूरी छोले, कढ़ाह, लस्सी एवं मुंह में पानी लाने वाली मिठाइयों का स्वाद चख सकता है। 

अमृतसर हेरिटेज वॉक

केंद्रीय सिख संग्रहालय

इस संग्रहालय में संतों, सिखों के गुरुओं, योद्धाओं एवं अन्य प्रमुख सिख नेताओं की चित्रकारी प्रदर्शित की गई हैं। यहां पर प्राचीन पांडुलिपियों, हथियारों एवं सिक्कों का समृद्ध संग्रह देखने को मिलता है। अच्छी तरह से संग्रहित पुस्तकालय के अतिरिक्त इसमें सिख कलाकारों द्वारा बनाई गईं चित्रकारी, संगीत वाद्य, पेंसिल से बने रेखाचित्र एवं बंदूकें भी रखी गई हैं। गुरु गोविंद सिंह की व्यक्तिगत चीज़ों के अवशेष भी यहां पर रखे गए हैं। इनमें लकड़ी का कंघा, तीर-कमान, लोहे के छल्ले, जो योद्धा अपनी पगड़ियों पर पहनते थे तथा लोहे की तारों से बनी जैकेट प्रमुख हैं।

केंद्रीय सिख संग्रहालय