उत्तर प्रदेश स्थित आगरा शहर जहां विश्व के सात अजूबों में एक ताजमहल स्थित है, यह भारत के बेहद लोकप्रिय पर्यटक गंतव्यों में से एक है। ऐतिहासिक महत्व वाली इस नगरी में अनेक स्मारक हैं, जो वास्तुकला की दृष्टि से बेहद नायाब व सुंदर प्राकृतिक दृश्यों वाले बागों से सुसज्जित हैं। ये स्मारक मुग़लकाल की शानदार विरासत के द्योतक हैं। इस शहर में स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं, जबकि यह उत्कृष्ट कला एवं शिल्प को संरक्षित किए हुए है।

यमुना नदी के किनारे पर बसा यह शहर जो कभी मुग़लशासकों की राजधानी हुआ करता था, वर्तमान में राजसी विरासत के साथ शान से खड़ा हुआ है। यह हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां आने वाले आगंतुक जब चहल-पहल वाले चौक एवं बाज़ारों से होकर गुज़रते हैं तब वे इस शहर में स्थित भव्य स्मारकों के वास्तुशिल्प का आनंद उठाते हैं। वे यहां स्थित आलीशान होटलों में ठहर सकते हैं, मॉल्स एवं प्लाज़ा में ख़रीदारी कर सकते हैं और बड़े रेस्तरां में आधुनिक पकवानों का स्वाद भी चख सकते हैं।

आगरा का उल्लेख महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है, जिसमें इसे ‘आगराबन’ अथवा भगवान श्रीकृष्ण की ब्रजभूमि का अभिन्न हिस्सा बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि सिकरवार राजपूत शासक राजा बादल सिंह के शासनकाल में अनेक ऐतिहासिक घटनाएं घटित हुईं, जिन्होंने 1475 में इस शहर की स्थापना की थी। यद्यपि राजनीतिक रूप से इस शहर की ख्याति लोधी राजवंश के शासक सिकंदर लोधी के शासनकाल (1498-1517) के दौरान बढ़ी। मुग़लशासक बाबर के शासनकाल 1526 ईस्वी में इस शहर को नया जीवन मिला। वह कला का संरक्षक था तथा चाहता था कि शहर में रहने वाले कारीगर अपने जीवन में बेहतरीन चीज़ों को अपनाएं। इसी का परिणाम हुआ कि यह शहर कुशल शिल्पकारों, कारीगरों, राजनेताओं, योद्धाओं एवं कुलीन लोगों से परिपूर्ण हो गया। तभी से आगरा का स्वर्णिम काल आरंभ हुआ। 

बाबर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले अकबर, जहांगीर एवं शाहजहां जैसे मुग़ल शासक हैं। उन्होंने इस शहर की शान में सम्पत्ति, कला व कलाकारों के संरक्षण तथा अविश्वसनीय वास्तुशिल्प के चमत्कारों के लिहाज़ से बढ़ोतरी की। आगरा कला, संस्कृति, शिक्षा एवं व्यापार का सबसे अहम केंद्र बनकर उभरा। इस नगरी में मिलने वाले लज़ीज़ व्यंजन, आकर्षित करते स्मारक तथा कला व शिल्प इसके गौरवशाली अतीत का ही बखान करते प्रतीत होते हैं। आगरा में विरासत का आधुनिकता के तत्वों के साथ सम्मिश्रण देखने को मिलता है। आगरा संगमरमर एवं पत्थरों पर की गई महीन नक्काशी से युक्त शिल्पकारी का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसा कहा जाता है कि कला एवं हस्तशिल्प के विकास में मुग़ल रानी नूरजहां व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी लिया करती थी। वह स्वयं भी ज़री की कढ़ाई करने में दक्ष थी।

वहां कैसे पहुंचें