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कच्छ का रन, गुजरातचांदी की भांति चमकने वाले अपने विस्मयकारी परिदृष्य के लिए प्रसिद्ध, कच्छ का रन - जो भारत में नमक का सबसे बड़ा ख़ार है औरयह ख़ार 7,500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, यहीं पर आयोजित किया जाता है वार्षिक रन उत्सव।इस महोत्सव के दौरान हमें गुजरात की संस्कृति, यहां के पकवानों, कला, षिल्प, संगीत एवं नृत्य की रंग-बिरंगी झलक देखने को मिलतीहै। अक्टूबर से फरवरी तक, कच्छ की चमकीली ष्वेत मरुभूमि स्थानीय रंगों एवं संस्कृति की छाया से सराबोर हो जाती है। यहां आने वालेआगंतुक निस्संदेह एक अलग ही दुनिया में विचरण करने लगते हैं।वहां क्या करें?यहां होने वाले कहानी के सत्रों का हिस्सा बनकर, प्रकृति की प्राचीनता को निहारते हुए अथवा रेगिस्तान में चहलकदमी करते हुए आपइतिहास के गहरे सागर में गोता लगा सकते हैं। आप चाहें तो स्थानीय कलाकारों के गीतों को गुनगुनाते हुए या लोक संगीतकारों की उत्साहित धुनों पर थिरक भी सकते हैं। ऊंटों द्वारा दूर तक फैली मरुभूमि की सैर कर सकते हैं या फिर हाॅट एयर बैलून के माध्यम से हवा मेंउड़ान भर सकते हैं। यहां से आपको आसपास के इलाकों का विहंगम दृष्य देखने को मिलेगा।इस महोत्सव में ख़रीदारी का सुनहरा अवसर भी मिलेगा। आप आसपास के गांवों में जाकर, वहां पर स्थानीय कारीगरों से संपर्क साध सकतेहैं, जो पारंपरिक हस्तषिल्प बनाने में जुटे रहते हैं। गांवों में अनेक कार्यषालाओं का संचालन भी किया जाता है। यहां पर आप राज्य कीकला और षिल्प के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आप यहां से स्मृति-चिह्न के रूप में षीषे जड़े हुए परिधान, ब्लाॅकप्रिंट, चांदी के आभूषण, लकड़ी की नक्काषी वाला सामान एवं सीप से बने खिलौने ले जा सकते हैं। कच्छ इस तरह के सामान के लिएप्रसिद्ध है।इनके अलावा, यहां पर गोल्फ़ कार्ट, एटीवी की सवारी, पेंटबाॅल, खेल-गाड़ी की सैर, पैरामोटरिंग तथा घुड़सवारी की भी सुविधा उपलब्ध है।जो लोग षांति एवं सुकून के पल बिताना चाहते हैं, वे महोत्सव के दौरान यहां पर आयोजित होने वाले ध्यान और योग के सत्रों में हिस्साले सकते हैं। गुजराती संस्कृति के कई पहलुओं का प्रदर्षन किया जाता है क्योंकि कलाकार अपने रंगीन कपड़ों में घूमते हैं, विक्रेता स्वादिष्टस्थानीय व्यंजन बेचते हैं और लोक कलाकारांे द्वारा नाच-गाना आयोजित किया जाता है।कहां पर ठहरें?रन का प्रामाणिक अनुभव प्राप्त करना हो तो आपको चाहिए कि आप यहां पर लगने वाली विषाल टैंट सिटी में ठहरें। यहां पर 400 से अध्िाक टैंट लगाए जाते हैं, जिनमें से कुछ एयर-कंडिषन होते हैं। यह टैंट सिटी, भुज से लगभग 80 किलोमीटर दूर धोरडो गांव के बाहरीइलाके में बनाई जाती है। इस मरुभूमि में अनेक स्विज़ लग्ज़री टैंट दिखाई देते हैं, जो भव्य पोर्च एवं षानदार कालीनों से सुसज्जित होतेहैं। यादगार पलों को सहेजकर रखने के लिए आगंतुक इन कैम्पों में ठहर सकते हैं।जाने का उचित समयकच्छ का दौरा करने के लिए पूर्णिमा की रात सबसे उचित समय होता है, जब चांद सूर्य की भांति चमक रहा होता है। मुलायम चांदनी मेंनहाया हुआ ष्वेत मरुस्थल ऐसे चमकता हुआ प्रतीत होता है मानो वह कीमती रत्नों से जड़ा हुआ हो। नववर्ष की पूर्व संध्या, गणतंत्र दिवसएवं होली के अवसर पर तो इस महोत्सव में आयोजनों की बहार देखने को मिलती है। मकर संक्रांति पर तो यहां पर पतंगबाज़ी का विषेष का विषेषआयोजन किया जाता है।