calendar icon Tue, November 12, 2019

सिख धर्म का आरंभ करने वाले सिखों के दसवें गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म जिस दिन हुआ था, उस अवसर पर गुरुपूरब अथवा गुरु पर्व मनाया जाता है। भारत में गुरुपूरब या गुरु नानक जयंती एक महत्वपूर्ण पर्व है। ‘गुरुपूरब’ शब्द में ‘गुरु’ का अर्थ होता है पालनहार तथा ‘पूरब’ का अर्थ होता है ‘दिन।’ इसलिए इस विशेष दिवस को गुरु का दिन माना जाता है। यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान पहले 48 घंटों तक सिखों के पवित्र गुरुग्रंथ साहिब जी का पाठ किया जाता है। इसे ‘अखंड पाठ’ कहा जाता है और परिवार का हर एक सदस्य इसमें सम्मिलित होता है। सभी परिजन एकत्रित होकर गुरुवाणी का पाठ करते हैं। सभी श्रद्धालुगण गुरुनानक की शिक्षा एवं संदेशों को अपनाने तथा अपने जीवन में उनका पालन करने का प्रयास करते हैं। 


कैसे मनाते हैं यह पर्व?
गुरुपूरब की सुबह ‘रुमाला साहिब’ नामक अनुष्ठान किया जाता है। इसमें एक कपड़े से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब जी को ढकते हैं। इसके साथ-साथ स्वादिष्ट प्रसाद बनाया जाता है। यह प्रसाद सभी परिजनों में वितरित किया जाता है। बाद में सभी लोग सज-धजकर गुरुद्वारे जाते हैं। वहां पर वे शब्द कीर्तन में शामिल होते हैं। गुरुद्वारे में ग्रंथी पवित्र ग्रंथ में दिए गए उपदेशों को भजन के रूप में प्रस्तुत करते हैं। श्रद्धालुगण अपने गुरुओं के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाएं तथा मानव कल्याण हेतु किए गए उनके त्याग की गाथाएं ध्यानमग्न होकर सुनते हैं। तत्पश्चात् सभी लंगर ग्रहण करते हैं। लंगर के दौरान श्रद्धालु पंक्तियों में बैठकर भोजन करते हैं, जिसे प्रसाद कहते हैं।

शाम को, सभी लोग रंग-बिरंगी लाइटों एवं दीयों से अपने घरों को सजाते हैं। सभी वर्गों के लोग पटाखे चलाते हैं तथा बड़ी धूमधाम से इस पर्व को मनाते हैं।