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हिंदुओं द्वारा समस्त भारत में मनाया जाने वाला भाई दूज का पर्व, वास्तव में भाई-बहन के पावन रिश्ते को मज़बूती प्रदान करता है। सामान्य रूप से, यह पर्व दीवाली के दो दिनों के बाद मनाया जाता है। इस विशेष दिन, बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं। बहनें अपने भाइयों को अपने घर पर आमंत्रित करती हैं। वे उनके माथे पर टीका लगाती हैं और उन्हें मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करती हैं। इसके बदले में भाई, अपनी बहनों को उपहार भेंट स्वरूप देते हैं।

भारत में भाई दूज विभिन्न नामों से जाना जाता है। गुजराती, कोंकणी तथा मराठी भाषा बोलने वाले समुदाय के लोग इस पर्व को भाऊ बीज कहते हैं, जबकि बंगाली इसे भाई फोटा कहते हैं। नेपाल में यह पर्व भाई टीका कहलाता है। 

क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाई दूज के अवसर पर मृत्यु के देवता यमराज एक बार अपनी बहन यमी ‘अथवा यमुना’ के घर पर गए थे। यमी ने यमराज का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके माथे पर टीका लगाया तथा उन्हें स्वादिष्ट मिठाई खाने को दीं। यमी की आव-भगत से प्रभावित होकर यमराज बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने यमी को उपहार भेंट किए। यह उनके प्रेम का प्रतीक था। यमराज ने घोषणा की कि जो भाई अपनी बहन के निमंत्रण पर उसके घर जाएगा और जिस प्रकार से मेरा स्वागत-सत्कार हुआ, उसका भी होगा तो उसे मृत्यु का भय कभी नहीं सताएगा। इस कथा के अनुरूप, इस पर्व को देश के अनेक हिस्सों में यम द्वितीय के रूप में मनाया जाता है। 

एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर का वध करके जब भगवान कृष्ण अपने घर पर लौटे तो उनकी बहन सुभद्रा ने उनका भव्य रूप से स्वागत किया। सुभद्रा ने उनके माथे पर टीका लगाया, पुष्प अर्पित किए, उनकी आरती उतारी तथा उन्हें मिष्ठान का भोग लगाया। तभी से भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।