कदमों में बिछा कालीन

ट्यूलिप फेस्टिवल में आपका स्वागत है। दीप्ति अंगरीष बता रही हैं कि कष्मीर में खिलने वाले ये रंग-बिरंगे फूल सभी का मनमोह लेंगे।यदि आप फूलों के षौकीन हैं और कष्मीर घूमने जाने की योजना बना रहे हैं, तो देर मत कीजिए। जल्दी प्लान बनाइए क्योंकि अपै्रल के पहले सप्ताह में यहां ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन होता है। जबरवान पहाड़ियों की तलहटी में दक्षिण एषिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है। यहां खिलने वाले सफेद, पीले, नीले, नारंगी, लाल, गुलाबी रंग के ट्यूलिप आपको अभिभूत कर देंगे।अनोखा अनुभवहर साल की भांति इस साल भी अप्रैल में यहां ट्यूलिप पुश्पों का महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। फूलों की विभिन्न किस्में व महक आपको फूल प्रेमी होने का तमगा प्रदान करेंगी। रंगों की रंगीली छटा बिखेरते ट्यूलिप आपको ट्यूलिप लवर बना देंगे। ट्यूलिप गार्डन में खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल यहां आने वाले हर एक पर्यटक को मोहित कर देते हैं। दषकों से सतरंगी फूलों से सजा यह गार्डन घाटी में पर्यटकों के आकर्शण का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां पर आप ट्यूलिप की अनेक प्रजातियों को करीब से देख सकते हैं और अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। ‘‘देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए, दूर तक निगाह में हैं गुल खिले हुए,’’ फ़िल्म ‘सिलसिला’ का यह गीत आज भी लोगों की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है। जी हां, कुछ ऐसा ही है ट्यूलिप फेस्टिवल का रंग-रूप। यह फेस्टिवल श्रीनगर की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। सम्पूर्ण विष्व में आपने फूलों पर आधारित व केंद्रित महोत्सवों के संबंध में नहीं सुना होगा। यदा-कदा सुना भी होगा, तो फ्लॉवर षो के बारे में। किंतु ट्यूलिप फेस्टिवल भारत में फूलों पर आधारित अद्वितीय महोत्सव है। इसमें आकर्षक व मनमोहक ट्यूलिप के प्रस्फुटन के अवसर को कष्मीर में पर्व के रूप मनाया जाता है। या यूं कहें कि इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन श्रीनगर के प्राकृतिक सौंदर्य को अधिक अनुपम बना देता है। एषिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन जबरवान रेंज पर बना व पांच हेक्टेयर में फैला है। यहां से डल लेक का खूबसूरत अवलोकन होता है। इस गार्डन का निर्माण कष्मीर में फ्लोरिकल्चर व पर्यटन को प्रोत्साहित करने हेतु किया गया था। विविध रंगों के पुष्प और मोहित करने वाली उनकी महक आपको ट्यूलिप फेस्टिवल में बार-बार आने को विवष करेंगे। वसंत का स्वागतहर साल होने वाले इस ट्यूलिप फेस्टिवल में वसंत-बहार को सराहा जाता है। अप्रैल में जब ये फूल खिलते हैं और इनकी सुंदरता अपने चरम पर होती है, उसी अवधि में यह महोत्सव आयोजित किया जाता है। यह फेस्टिवल 15 दिनों तक चलता है क्योंकि एक पखवाड़े के पष्चात ये फूल मुरझाने लगते हैं। यदि आप ट्यूलिप फेस्टिवल-2017 में षिरकत नहीं कर पाए थे तो ट्यूलिप फेस्टिवल-2018 में आपका स्वागत है। इस महोत्सव में आप ट्यूलिप फूलों की सुंदरता के अवलोकन के साथ-साथ स्थानीय लोकगीत-लोकसंगीत का भरपूर आनंद ले सकते हैं तथा कष्मीर के लज़ीज़ व्यंजनों का स्वाद भी चख सकेंगे। यहां पर आपको कष्मीरी संस्कृति को करीब से जानने का सुअवसर मिलेगा। दुनिया भर के फूल प्रेमी, नेचर लवर तथा ट्यूलिप लवर इस फेस्टिवल में षिरकत करते हैं। यहां पर आपको स्टैंडर्ड ट्यूलिप, डबल ब्लूम, पैरट ट्यूलिप, फ्रिंज्ड ट्यूलिप, बाई-कलर स्टैंडर्ड ट्यूलिप, रेमब्रांड, फॉस्टेरिआना ट्यूलिप्स, लिलि फ्लॉवरिंग ट्यूलिप, सिंगल लेट ट्यूलिप, ट्राइअम्फ आदि देखने को मिलेंगे। फेस्टिवल में आप रंग-बिरंगे ट्यूलिप की 60 किस्में देख सकेंगे। रंगीन छटा बिखेरते ट्यूलिप ऐसे लगते हैं मानो फूलों का गलीचा बिछा हो। यहां लगभग 12 लाख से अधिक ट्यूलिप फूल खिलते हैं। इन्हें देखने के लिए अंतरराश्ट्रीय पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं। कष्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिषा में ही 2007 में इस महोत्सव के आयोजन की प्रथा आरंभ की गई थी। निस्संदेह प्रषासन अपने मकसद में कामयाब भी रहा है। यहां आने वाले सैलानियों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती ही जा रही है। घूमने का आनंद कष्मीर जाने के दौरान आप आसपास की जगहों पर सैर-सपाटा कर सकते हैं। यहां देखने लायक बहुत सी जगह हैं जैसे- चष्माषाही गार्डन, परी महल, षंकराचार्य मंदिर, निषात गार्डन, मुग़ल गार्डन, षालीमार बाग, डल लेक, नागिन लेक, हज़रतबल दरगाह और स्थानीय बाज़ार। बता दें कि स्थानीय बाज़ारों से आप श्रीनगर के मषहूर उत्पाद ख़रीद सकते हैं। मसलन चमड़े से बने उत्पाद, कष्मीरी षॉलें, कालीन, मैट्स, रग्स, स्वेटर, सूखे मेवे आदि। यहां के खूबसूरत बाग-बगीचे, सफेद रुई नुमा बर्फ से