हिंदुओं का पावन पर्व मकर संक्रांति सूर्य भगवान को समर्पित है। यह त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में विविध प्रकार से मनाया जाता है।इस पर्व के दौरान हर राज्य की अनोखी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। जैसे-जैसे आप भारत के भिन्न-भिन्न इलाकों का भ्रमणकरेंगे, आपको वहां मनाए जाने वाले इस पर्व के विभिन्न स्वरूप दिखेंगे। यहां पर कुछ ऐसे ही गंतव्यों के बारे में बताया जा रहा है, जहां परआपको अवष्य जाना चाहिए।

दिल्ली
देष की राजधानी दिल्ली में मकर संक्रांति बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, भाई अपनी विवाहित बहनों को उपहार मेंगर्म कपड़े देते हैं। इस अनुष्ठान को ‘सिद्ध’ कहते हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं अपनी सास-ष्वसुर को भेंटस्वरूप वस्तुएं प्रदान करती हैं। इसे‘मनाना’ कहते हैं। इस त्योहार के दौरान भव्य रूप से भोज का आयोजन किया जाता है। इस दौरान खाने के लिए खीर, हलवा एवं घी सेबना चूरमा परोसते हैं।

गुजरात
मकर संक्रांति गुजरात में उरायण के रूप में दो दिनों तक मनाया जाता है। उरायण के दौरान दुनिया का सबसे बड़ा पतंग महोत्सवआयोजित किया जाता है। इसमें दुनिया भर के पतंगों में रुचि रखने वाले लोग हिस्सा लेते हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक भी इस अनोखेआयोजन की झलक पाने को यहां खिंचे चले आते हैं। उन्हें यहां पर विभिन्न आकार-प्रकार की पतंगें देखने को मिलती हैं।
इस महोत्सव केदौरान पूरा आकाष रंग-बिरंगी पतंगों से ढक जाता है। कई लोग तो पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए यहां आते हैं। इसअवसर पर वे अपनी कला एवं दक्षता का परिचय देते हैं। इस प्रतियोगिता के पूर्वानुमान एवं इसकी तैयारियां तड़के ही आरंभ हो जाती हैं।इस महोत्सव का उल्लास तथा प्रफुल्लित कर देने वाली प्रतिस्पर्धा की भावना सूर्यास्त तक बनी रहती है।देष में मनाए जाने वाले अन्य पर्वों की भांति उत्तरायण में भी परिवारजनों और दोस्तों को एक दूसरे के साथ समय बिताने तथा पतंगबाज़ी मेंहिस्सा लेने का सुअवसर मिलता है।
घरों में स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन व्यंजनों में सबसे लोकप्रिय लड्डू और सुरती जामुनउंधियू (मिश्रित सब्जी से बना गुजराती पकवान) होता है।इस त्योहार का एक विषेष आकर्षण पतंगों पर साउंड एंड लाइट षो है। इसे देखकर आपको एक अनोखा अनुभव प्राप्त होगा। इस अवसरपर षहरों में कई प्रषिक्षण कार्यषालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें आपको पतंग बनाने वालों के साथ बातचीत करने और सुंदर किस्मोंकी पतंगें ख़रीदने का मौका मिलेगा। इन सभी आयोजनों का मुख्य कंेद्र अहमदाबाद षहर होता है।

राजस्थान
मकर संक्रांति इस राज्य में प्रमुखता से मनाए जाने वाले पर्वों में से एक है। इस दौरान विवाहित महिलाओं द्वारा अनेक प्रकार के अनुष्ठानकिए जाते हैं। इस विषेष दिन पर, महिलाएं अन्य 13 महिलाओं को घरेलू उपयोग की चीज़ें उपहार में देती हैं। परंपरा के अनुसार, नवविवाहिता के लिए पहला मकर संक्रांति बहुत ही पावन माना जाता है। उसके माता-पिता उसे खाने पर बुलाते हैं और भव्य रूप से आयोजित इसआयोजन को ‘संक्रांत भोज’ कहते हैं। इस दौरान जो व्यंजन परोसे जाते हैं, उनमें तिल के लडडू, गज़क, फेनी, घेवर, पकौड़ी इत्यादि प्रमुखहोते हैं।इस दौरान एक अन्य लोकप्रिय रस्म पतंगबाज़ी होती है। सैकड़ों लोग अपनी रंग-बिरंगी पतंगों से सारा आसमान भर देते हैं।

महाराष्ट्र
कोई भी त्योहार महाराष्ट्र में बिना भोज के अधूरा माना जाता है। मकर संक्रांति के अवसर पर भी भव्य रूप से प्रीतिभोज का आयोजनकिया जाता है। बड़ी धूमधाम से व्यापक स्तर पर मनाए जाने वाले इस पर्व के दौरान अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। इनमेंगुलाची पाली या पूरन पाली, हलवा, तिल लड्डू प्रमुख होते हैं। इन मीठे पकवानों को बनाने से यही संदेष प्रसारित होता है कि हमें भाईचारा बनाए रखना चाहिए तथा सभी के साथ मित्रवत् भाव से रहें।

उाराखंड
मकर संक्रांति उाराखंड में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह विषेष दिन मौसम में होने वाले परिवर्तन को इंगित करने के लिएमनाया जाता है। यही वह समय होता है जब प्रवासी पक्षी पहाड़ों पर लौटना आरंभ कर देते हैं। इस दिन लोग नदियों में डुबकी लगाते हैं,ज़रूरतमंदों को खिचड़ी खाने को देते हैं तथा मेलों में घूमने जाते हैं।इस पर्व पर विषेष तौर से मिठाइयां बनाई जाती हैं, जिनमें घी में बने षक्कर पारे प्रमुख होते हैं। ये षक्कर पारे विभिन्न आकार के होतेहैं तथा इनकी माला बना ली जाती है। बच्चे इन मालाओं को अपने गले में पहन लेते हैं और इनके टुकड़े उन पक्षियों को खिलाते हैं, जोसर्दियां बिताकर पहाड़ों पर लौट आते हैं।

असम
मकर संक्रांति के बजाय असम में माघ बिहू अथवा भोगाली बिहू मनाया जाता है। यह भी कृषि-प्रधान पर्व होता है और पूरे सप्ताह दावतोंका आयोजन किया जाता है। इस दौरान अनेक आयोजन किए जाते हैं। लोग उत्साह एवं उमंगपूर्वक झोंपड़ियां बनाते हैं, जो बांस औरछप्पर की होती हैं। अगले दिन इन झोपड़ियों को जला दिया जाता है। इस मौके पर लोग अनेक प्रकार के पारंपरिक खेल खेलते हैं। इनमेंटेकेली भोंगा या बर्तन को तोड़ने वाला खेल प्रमुख होता है। इस पर्व पर विषेष तौर से चावल से बने व्यंजन और नारियल से बनी मिठाइयांबनाई जाती हैं।

हिमाचल प्रदेष
मकर संक्रांति को हिमाचल प्रदेष में माघ साजी कहा जाता है। यह नए माह के आरंभ होने का प्रतीक होता है। इस दौरान प्रवासी पक्षीपहाड़ों पर लौटने आरंभ होने लगते हैं। इस विषेष दिन पर लोग भोर में उठकर परंपरा के अनुसार नदियांे या झीलों में डुबकी लगातेहैं। बाद में सभी अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ मिल-बैठकर समय व्यतीत करते हैं। वे एक दूसरे को खिचड़ी, घी एवं छाछ काआदान-प्रदान करते हैं। इस अवसर पर लोग नाचते एवं गाते हैं।

पंजाब
पंजाब में मकर संक्रांति माघी के रूप में मनाई जाती है। लोग तड़के उठकर नदियों में स्नान करते हैं और संध्या में वे तिल के तेल से भरेदीये जलाकर उन्हें नदियों में प्रवाहित करते हैं। लोग ऐसा इस विष्वास से करते हैं कि ये दीये उनके जीवन में समृद्धि लेकर आएंगे औरबुरी आत्माओं से बचाएंगे। इस अवसर पर लोग भांगड़ा भी करते हैं, जो एक पारंपरिक नृत्य है। इसके अलावा स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वादचखते हैं।

कर्नाटक
कर्नाटक में किसान मकर संक्रांति को ‘सुग्गी’ के नाम से मनाते हैं। लोग इस अवसर पर नए कपड़े पहनकर अपने रिष्तेदारों एवं मित्रों केयहां जाते हैं। वे एक दूसरे को ‘एल्लु’ भेंट करते हैं, जो सफेद तिल में सूखा नारियल, सूखी मूंगफली और गुड़ अथवा ‘बेल्ला’ मिलाकरबनाया जाता है। यह व्यंजन ‘एल्लु बिरोधु’ नामक अनुष्ठान के दौरान आदान-प्रदान किया जाता है। एक अन्य अनुष्ठान के अनुसार, एकविवाहित महिला अगले पांच साल तक दूसरी विवाहित महिला को केले भेंटस्वरूप देगी। कुछ महिलाएं केलों के साथ लाल बेर भी देती हैं।पतंगबाज़ी और रंगोली बनाना इस समारोह का अभिन्न हिस्सा होते हैं।

उतर प्रदेष
मकर संक्रांति के अवसर पर उार प्रदेष के निवासी प्रयागराज, हरिद्वार एवं वाराणसी में पावन नदियों के जल में स्नान करते हैं। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान लोग आमतौर पर उपवास रखते हैं। स्नान करने के पष्चात् वे तिल के लड्डू जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाकर अपनाव्रत तोड़ते हैं। इस प्रदेष में मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी करना एक अन्य प्रमुख आयोजन होता है।

बिहार
मकर संक्रांति के मौके पर बिहार के लोग अच्छी फसल होने की खुषी में नदियों में स्नान करके स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं। इन पकवानों मेंतिल एवं गुड़ से बनी मिठाइयां प्रमुख होती हैं। समस्त राज्य में पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इस पर्व के दौरानलोग प्रार्थनाएं करते हैं और अग्नि में तिल अर्पित करते हैं। इसके पष्चात् वे दही-चिड़वा का सेवन करते हैं। संध्या में लोग खिचड़ी पकातेहैं और भुनी हुई सब्ज़ियों, घी, अचार एवं पापड़ के साथ मिल-बैठकर खाते हैं।

ओडिषा
इस पर्व के दौरान जब सर्दियां जाने को होती हैं, तब बदलते मौसम में खाने की चीज़ों में भी बदलाव देखने को मिलता है। मकर संक्रांतिपर लोग छेना पुडिंग, खाई/लिया, रसगुल्ला इत्यादि का सेवन करते हैं। लोग पुरी षहर में स्थित प्रसिद्ध कोणार्क मंदिर में जाकर भगवानसूर्य की पूजा-अर्चना करते हैं।पष्चिम बंगालस्थानीय बोली में यह त्योहार पोष संक्रांति कहलाता है। यह पर्व फसल कटाई का सत्र आरंभ होने के उपलक्ष्य पर मनाया जाता है। लोगइस मौके पर पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं। ये पकवान सत्र की पहली फसल से बनाए जाते हैं। इस विषेष अवसर पर लोग देवी लक्ष्मी की भीपूजा करते हैं। यद्यपि दार्जिलिंग से सटे इलाकों में भगवान षिव की अर्चना की जाती है।